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विकलता, बेचैनी और अस्थिरता
इस बार माँ दुर्गा चरणायुध पर जाएँगी। विजयादशमी मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को है।
और आगमन: हाथी पर आगमन
जब विजयादशमी मंगलवार या शनिवार को होती है, तो माँ दुर्गा की विदाई चरणायुध पर होती है।
"चरणायुध" का अर्थ है — जिसके चरण (पैर) ही उसके आयुध (शस्त्र) हों। शास्त्र इस पक्षी को इसी नाम से पुकारते हैं। श्लोक कहता है "चरणायुध यानि करी विकला" — चरणायुध पर गमन से लोगों में विकलता (बेचैनी, दुख) और अस्थिरता का संकेत मिलता है।
वाहन केवल वर्ष के संकेत बताता है, भय का कारण नहीं। श्रद्धा से घटस्थापना, नित्य पूजा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करने पर माँ हर कष्ट दूर करती हैं।
शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुज शोककरा। शनि भौम दिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करी विकला॥ बुध शुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभ वृष्टिकरा। सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य करा॥
विजयादशमी रविवार-सोमवार को हो तो माँ भैंसे (महिष) पर जाती हैं — रोग और शोक; शनिवार-मंगलवार को चरणायुध पर — विकलता; बुधवार-शुक्रवार को हाथी पर — शुभ वर्षा; और गुरुवार को नर वाहन पर — सुख-सौख्य।
— देवी भागवत पुराण
विजयादशमी किस वार को है — उसी से वाहन तय होता है:
तिथि विजयादशमी की है। विदाई का वाहन शारदीय नवरात्रि में देखा जाता है।