वे रात्रिदेवी इस समय मुझपर प्रसन्न हों, जिनके आनेपर हमलोग अपने
घरोमें सुखसे सोते हैं-ठीक वैसे ही, जैसे रत्रिके समय पक्षी वृक्षोंपर बनाये
जैसे धन देकर अपने भक्तौके ऋण दूर करती हो, उसी प्रकार ज्ञान देकर इस
स्तुति आदिसे तुम्हें अपने अनुकूल करता हू । परम व्योमस्वरूप परमात्माकौ
पुत्री | तुम्हारी कृपासे मैं काम आदि शत्रुओंको जीत चुका हूँ, तुम स्तोमकी भाँति