शिवजी बोले- ह देवि! तुम भक्तोके लिये सुलभ हो और समस्त कर्मोका
विधान करनेवाली हो। कलियुगमें कामनाओंकौ सिद्धि-हेतु यदि कोई उपाय
हो तो उसे अपनी वाणीद्रारा सम्यक्-रूपसे व्यक्त करो।
देवीने कहा--हे देव! आपका मेरे ऊपर बहुत स्नेह है । कलियुगमें समस्त
कामनाओंको सिद्ध करनेवाला जो साधन है वह बतलाऊँगी, सुनो! उसका नाम
है 'अम्बास्तुति '।
ॐ इस दुर्गासप्तश्लोकी स्तोत्रमन्त्रके नारायण ऋषि हैं, अनुष्टुप् छन्द है,
श्रीमहाकाली, महालक्ष्मी ओर महासरस्वती देवता हैं, श्रीदुर्गाकी प्रसननताके
माँ दुर्गे । आप स्मरण करनेपर सब प्राणियोंका भय हर लेती हैं और स्वस्थ
पुरुषोंद्दारा चिन्तन करनेपर उन्हें परम कल्याणमयी बुद्धि प्रदान करती हैँ । दुःख,
दरिद्रता ओर भय हरनेवाली देवि! आपके सिवा दूसरी कौन है, जिसका चित्त
देवि! तुम प्रसन होनेपर सब रोगोँको नष्ट कर देती हो ओर कुपित होनेपर
मनोवांछित सभी कामनाओंका नाश कर देती हो। जो लोग तुम्हारी शरणमे जा
चुके हैं, उनपर विपत्ति तो आती ही नहीं । तुम्हारी शरणमे गये हुए मनुष्य