ॐ
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कबीर प्रार्थना करते हैं कि हे प्रभु! संसार को भले ही सांसारिक भोग-वस्तुएँ दें, परंतु मुझे तो ब्रह्म-ज्ञान दें। लोग संसार के धोखे (मोह) में ही पड़े रहते हैं और इसी में सारा जीवन-संसार बीत जाता है। यह दोहा सांसारिक मोह से ऊपर ब्रह्म-ज्ञान की कामना व्यक्त करता है।