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बैंगलोर · श्री जीमूतवाहन
अष्टमी सूर्योदय से पहले समाप्त हो रही है — सूर्योदय के बाद पूजा करके व्रत खोलें।
जितिया से एक दिन पहले माताएँ स्नान कर घर की शुद्धि करती हैं और कुल-परंपरा के अनुसार सात्त्विक भोजन ग्रहण करती हैं। यही व्रत की तैयारी का दिन है।
आश्विन कृष्ण अष्टमी को माताएँ संतान की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। जीमूतवाहन की पूजा होती है, कुशा से उनकी प्रतिमा बनाई जाती है और चील-सियारिन की कथा सुनी जाती है।
अगले दिन सूर्योदय के बाद, और अष्टमी तिथि समाप्त होने पर, पूजा करके व्रत खोला जाता है।
रविवार, 4 अक्टूबर
अष्टमी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाती है, इसलिए सूर्योदय के बाद पूजा करके जितिया व्रत खोलें।
समय बैंगलोर के अनुसार
जितिया का व्रत आश्विन कृष्ण अष्टमी को रखा जाता है और पारण अगले दिन किया जाता है। पारण सूर्योदय या अष्टमी समाप्ति — जो भी बाद में हो — के बाद आरम्भ होता है।
⏱ समय बैंगलोर के अनुसार · तिथि व नक्षत्र सम्पूर्ण भारत में समान
जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जितिया या जिउतिया भी कहते हैं, आश्विन कृष्ण अष्टमी को माताएँ अपनी संतान की लंबी आयु और कुशलता के लिए निर्जला रखती हैं। यह व्रत बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल में विशेष रूप से मनाया जाता है। तीन दिन का पर्व है — नहाय-खाय, निर्जला व्रत (खर जितिया) और पारण। इस दिन राजा जीमूतवाहन की पूजा होती है, जिन्होंने एक नाग माता के पुत्र की रक्षा के लिए अपना शरीर गरुड़ को अर्पित कर दिया था।