बुधवार का दिन बुध ग्रह और भगवान गणेश को समर्पित है। बुध ग्रह बुद्धि, वाणी, व्यापार और संचार का स्वामी है। जो बुधवार को व्रत करता है, उसकी बौद्धिक शक्ति, व्यापारिक कुशलता और संचार-कला में वृद्धि होती है।
एक समृद्ध व्यापारी के इकलौते पुत्र का नाम बुद्धिसेन था। वह बचपन से ही मंदबुद्धि था। पढ़ाई में पीछे, व्यापार में असफल और अपने साथियों में उपहास का पात्र। पिता बहुत चिंतित थे।
एक बार व्यापारी की भेंट एक ज्योतिषी से हुई। ज्योतिषी ने कहा, "आपके पुत्र की जन्म-कुंडली में बुध ग्रह अत्यंत कमजोर है। बुधवार का व्रत और बुध देव की उपासना से यह दुर्बलता दूर हो सकती है।"
बुद्धिसेन ने श्रद्धापूर्वक बुधवार व्रत आरंभ किया। प्रातःकाल उठकर स्नान करके गणपति मंदिर जाता। भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, हरे फूल और पंचामृत अर्पित करता। 'ॐ गं गणपतये नमः' का 108 बार जाप करता। साथ ही बुध ग्रह के लिए हरे मूंग की दाल, हरे फल और हरे वस्त्र का दान करता।
कुछ ही महीनों में चमत्कारी परिवर्तन हुआ। बुद्धिसेन की स्मृति तीव्र हो गई। उसने व्यापार सीखा और कम समय में बड़ा व्यापारी बन गया। उसकी वाणी में माधुर्य और तर्क दोनों आ गए।
एक दिन राजदरबार में एक जटिल विवाद था जिसे कोई हल नहीं कर पा रहा था। बुद्धिसेन ने सरल बुद्धि से उसे सुलझाया। राजा ने उसे अपना दीवान नियुक्त किया।
बुधवार व्रत से बुद्धि, विद्या, वाणी और व्यापार में सफलता मिलती है। विद्यार्थी, व्यापारी और लेखक सभी इस व्रत से विशेष लाभ उठाते हैं। जय विघ्नहर्ता! जय बुध देव!