प्राचीन काल में काशी नगरी में एक ब्राह्मण परिवार रहता था। ब्राह्मण की पत्नी सुमित्रा परम भक्तिन और पतिव्रता थी। उसके पाँच पुत्र थे। परंतु परिवार पर एक के बाद एक विपत्तियाँ आ रही थीं। उसके पति को एक असाध्य रोग हो गया था। बड़े पुत्र का व्यापार ठप्प था। शत्रुओं ने झूठे मुकदमे लगा दिए थे।
एक दिन एक संत ने सुमित्रा से कहा, "माता! मंगलवार भगवान श्री हनुमान का दिन है। मंगलग्रह के स्वामी हनुमानजी हैं। जो मंगलवार को उनका व्रत करता है, वे उसके सभी संकट हरते हैं। भगवान राम की भक्ति में लीन रहने वाले हनुमानजी अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदा तत्पर रहते हैं।"
सुमित्रा ने उसी मंगलवार से व्रत आरंभ किया। सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान किया। लाल वस्त्र पहने। हनुमान मंदिर गई और उन्हें सिंदूर, तेल, लाल पुष्प और नैवेद्य अर्पित किया। हनुमान चालीसा का पाठ किया, सुंदरकांड का पाठ किया। दिन में एक बार सात्त्विक भोजन किया।
पहले मंगलवार से ही परिवर्तन दिखने लगा। दूसरे मंगलवार को न्यायालय में झूठे मुकदमे खारिज हो गए। तीसरे मंगलवार पर पति का ज्वर उतरने लगा। पाँचवें मंगलवार तक बड़े पुत्र का व्यापार पुनः आरंभ हो गया। ग्यारहवें मंगलवार को पति पूर्णतः स्वस्थ हो गए।
एक बार की बात — मंगलवार के दिन घर में कोई सामग्री नहीं थी। सुमित्रा खाली हाथ मंदिर गई और केवल जल लेकर हनुमानजी के सामने बैठ गई। सच्चे मन से प्रार्थना की। उसी समय एक अपरिचित भक्त ने उन्हें पूजा-सामग्री और प्रसाद दिया। हनुमानजी ने उनकी भक्ति स्वीकार की।
मंगलवार व्रत से बाधाएं दूर होती हैं, शत्रुओं का नाश होता है, मुकदमे जीते जाते हैं, रोग दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति आती है। जय श्री राम! जय हनुमान! जय बजरंगबली!
अध्याय 2 — संकटमोचन हनुमान
हनुमानजी को संकटमोचन कहा जाता है — संकटों को मोचन करने वाले। मंगलवार उनका विशेष दिन है क्योंकि इसी दिन हनुमानजी ने लंका दहन करके माता सीता को श्रीराम का संदेश दिया था।
एक व्यापारी था जो अपने व्यापार के लिए दूर देश जाता था। एक बार वह बड़े कर्ज में डूब गया। समुद्री यात्रा में तूफान आया। वह जहाज से गिर गया। परंतु वह प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ता था।
लहरों में डूबते हुए उसे एक विशाल लाल रूप दिखाई दिया। हनुमानजी ने उसे बचाया और किनारे पहुँचाया। वहाँ उसे एक मणि मिली जो बहुत मूल्यवान थी। उस मणि से उसका सारा कर्ज चुकाया।
घर लौटने पर उसने मंगलवार व्रत करने का संकल्प लिया। जीवन भर उसने यह व्रत किया।
मंगलवार व्रत की विधि:
— सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें।
— लाल वस्त्र धारण करें।
— हनुमान मंदिर जाएं, सिंदूर, तेल, लाल पुष्प चढ़ाएं।
— हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ करें।
— दिन में एक बार भोजन करें — गुड़ और चने का प्रसाद लें।
— नमक का परिहार करें।
— किसी शक्तिहीन और जरूरतमंद को भोजन दान करें।
जो भक्त इस व्रत को नियमपूर्वक करते हैं, हनुमानजी उनकी रक्षा करते हैं, उनके शत्रु परास्त होते हैं और जीवन में मंगल होता है। जय हनुमान! जय बजरंगी! जय सियाराम!