उज्जयिनी नगरी में राजा विक्रमादित्य नाम के एक महान और न्यायप्रिय राजा थे। एक बार नवग्रहों में इस बात पर वाद-विवाद हुआ कि कौन सबसे श्रेष्ठ ग्रह है। राजा विक्रमादित्य को निर्णायक बनाया गया। राजा ने शनि देव को सबसे निम्न स्थान दिया। शनि देव अत्यंत क्रुद्ध हुए।
शनि देव ने कहा, "राजन! तुमने मुझे तुच्छ समझा है। अब देखो मेरी साढ़े साती का प्रभाव कैसा होता है।" शनि देव ने एक तेलिए का रूप धारण किया और विक्रमादित्य के राज्य में आए। विक्रमादित्य राजमहल छोड़कर शनि के प्रकोप से एक दासी के घर में रहने लगे। उन पर चोरी का झूठा आरोप लगा और न्यायालय ने उनके हाथ-पांव काटने का आदेश दे दिया।
इस प्रकार विक्रमादित्य बारह वर्षों तक अनेक कष्ट भोगते रहे। उन्होंने प्रत्येक शनिवार को शनि देव का व्रत किया, शनि स्तोत्र का पाठ किया और तिल, तेल का दीप जलाया। उनकी सच्ची भक्ति से शनि देव प्रसन्न हुए। वे स्वयं विक्रमादित्य के समक्ष प्रकट हुए और उनसे क्षमा मांगी। उन्होंने राजा के सभी अंग पुनः सही कर दिए और उनका राजपाट वापस दिलाया।
शनि देव ने कहा, "जो भी शनिवार को मेरा व्रत करेगा, शनि स्तोत्र पढ़ेगा, तिल का तेल दीप जलाएगा, उसे मेरी साढ़े साती और ढैय्या का भय नहीं रहेगा।" जय शनि देव!
अध्याय 2 — शनि देव की कृपा और व्रत विधि
शनि देव को नवग्रहों में सबसे न्यायप्रिय और कर्मफलदाता माना जाता है। वे कर्म के देवता हैं — जो जैसा बोता है, वैसा काटता है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या भले ही कठिन होती है, परंतु जो सच्चे मन से शनिदेव का व्रत करते हैं, उन्हें यह पीड़ा सहन करने की शक्ति और अंततः सफलता मिलती है।
एक गरीब किसान था जिसकी फसल हर साल किसी न किसी कारण से नष्ट हो जाती थी। उसके पड़ोसी उससे ईर्ष्या करते थे और उस पर झूठे आरोप लगाते थे। एक साधु ने उसे बताया, "शनि देव की साढ़ेसाती तुम पर है। शनिवार का व्रत करो, काले तिल और तेल का दान करो।"
किसान ने 19 शनिवार का व्रत किया। काले तिल को पानी में बहाया, पीपल के पेड़ में सरसों का तेल चढ़ाया, शनि स्तोत्र का पाठ किया। उस वर्ष उसकी फसल अभूतपूर्व हुई। पड़ोसियों के झूठे आरोप स्वयं निर्मूल हो गए।
शनिवार व्रत की विधि:
— सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
— काले वस्त्र या नीले वस्त्र धारण करें।
— पीपल वृक्ष की परिक्रमा करें और तिल-मिश्रित जल चढ़ाएं।
— शनि मंदिर में काले तिल, सरसों का तेल, काला उड़द और काले फूल चढ़ाएं।
— शनि स्तोत्र और शनि चालीसा का पाठ करें।
— काले तिल और तेल का दान करें, भिखारियों को काला वस्त्र और उड़द दाल दें।
— दिन में एक ही बार भोजन करें।
शनि देव कहते हैं — "जो सत्य की राह पर चलता है, कर्म करता है और मेरा शनिवार व्रत करता है, उसे मेरी साढ़ेसाती में भी मैं रक्षा करूंगा।" जय शनि महाराज!