युधिष्ठिर ने पूछा — प्रभो! भाद्रपद कृष्ण एकादशी का क्या नाम है? भगवान ने कहा — राजन्! इसका नाम अजा एकादशी है। इस व्रत के प्रभाव से राजा हरिशचंद्र को अपना खोया हुआ राज्य और पुत्र फिर मिला था। यह एकादशी सभी पापों का नाश करनेवाली और मोक्ष देनेवाली है। भाद्रपद मासकी ‘’ ओर ‘’ एकादशीका माहात्मम ५५ 'फे है हैई है हरे है हर है हरे हे हरे अरे अं अर हरे डे है डे जुट डे जोर डरे डे और डे डरे कै जी हद डे भी "हे है हे औ हे कै हे जे kk डे डे डे औे के कै "है के है की है है कि हे कि जे हे है है ।
मै लोमशजी बोले--प्रजाजनो ! श्रावण मासके जो
एकादशी होती है, वह 'पुत्रदा'के नामसे विख्यात है । वह मनोबाज्छित फल
प्रदान करनेवाली है। तुमलोग उसीका ब्रत करो। यह सुनकर प्रजाओंने मुनिको नमस्कार किया और नगरमें आकर
विधिपूर्वक पुत्रदा एकादशीके ब्रतका अनुष्ठान किया। उन्होंने विधिपूर्वक
जागरण भी किया और उसका निर्मल पुण्य राजाको दे दिया । तत्यश्चात् रानीने
गर्भ धारण किया और प्रसवका समय आनेपर बलवान् पुत्रको जन्म दिया | इसका माहात्म्य सुनकर मनुष्य पापसे मुक्त हो जाता है तथा इहलोकमें
सुख पाकर परलोकमें स्वर्गीय गतिको प्राप्त होता है। और
भाद्रपद मासकी 'अजा' ओर 'पद्मा एकादशीका माहात्म्य युधिष्ठिरने पूछा--जनार्दन | अब मैं यह सुनना चाहता हूँ कि भाद्रपद
मासके कृष्णपक्षमें कोन-सी एकादशी होती है ? कृपया बताइये। भगवान् श्रीकृष्ण बोले--राजन् ! एकचित्त होकर सुनो। भाद्रपद
मासके कृष्णपक्षकी एकादशीका नाम “अजा' है, वह सब पापोंका नाश
करनेवाली बतायी गयी है। जो भगवान् हृषीकेशका पूजन करके इसका व्रत
करता है, उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं | पूर्वकालमें हसिश्चन्द्र नामक एक
विख्यात चक्रवर्ती राजा हो गये हैं, जो समस्त भूमण्डलके स्वामी और
सत्यप्रतिज्ञ थे । एक समय किसी कर्मका फलभोग प्राप्त होनेपर उन्हें राज्यसे
भ्रष्ट होना VST | राजाने अपनी पत्नी और पुत्रको बेचा । फिर अपनेको भी
बेच दिया। पुण्यात्मा होते हुए भी उन्हें चाण्डालकी दासता करनी पड़ी | वे
मुर्दोका कफन लिया करते थे। इतनेपर भी earn सत्यसे
विचलित नहीं हुए। इस प्रकार चाण्डालकी दासता करते उनके अनेक वर्ष
व्यतीत हो गये । इससे-राजाको बड़ी चिन्ता हुई। वे अत्यन्त-दुःखी होकर
सोचने लगे--.'क्या करूँ ? कहाँ जाऊँ ? कैसे मेरा उद्धार होगा ?' इस "दर एकादशी-ब्रतका माहात्म्य PRIIIAAI डरे और डर अं जद डे जे AIIIAAAAAAAIIIAA हरे डरे हर अर है मे ASIII 'फैे है कै फैरे हर है हरे डे डरे परे हे हरे डरे डे हैहे ज़ए डरे डे डे
अध्याय 2 — राजा हरिशचन्द्र की कथा
अ्रकार चिन्ता करते-करते वे शोकके समुद्रमें डूब गये । राजाको आतुर
. जानकर कोई मुनि उनके पास आये, वे महर्षि गौतम थे। श्रेष्ठ ब्राह्मणको
आया देख नृपश्रेष्ठने उनके चरणोंमें प्रणम किया ओर दोनों हाथ जोड़
गौतमके सामने खड़े होकर अपना सारा दुःखमय समाचार कह सुनाया।
राजाकी बात सुनकर गौतमने कहा--'राजन् ! भादोंके कृष्णपक्षमें अत्यन्त
कल्याणमयी ‘SAS नामकी एकादशी आ रही है, जो पुण्य प्रदान करनेवाली
है। इसका व्रत करो। इससे पापका अन्त होगा। तुम्हारे भाग्यससे आजके
सातवें दिन एकादशी है। उस दिन उपवास करके रातमें जागरण करना ।'
ऐसा कहकर महर्षि गौतम अन्तर्धान हो गये। मुनिकी बात सुनकर
राजा RASA उत्तम व्रतका अनुष्ठान किया | उस ब्रतके प्रभावसे राजा
सारे दुःखोंसे पार हो गये। उन्हें पत्नीका सन्निधान और पुत्रका जीवन मिल
गया। आकाझमें दुन्दुभियाँ बज उठी | देवलोकसे फूलोंकी वर्षा होने लगी।
एकादशीके प्रभावसे राजाने अकण्टक राज्य प्राप्त किया ओर अन्तमें वे
पुरजन तथा परिजनोंके साथ स्वर्गलोकको प्राप्त हो गये। राजा युधिष्टिर !
जो मनुष्य ऐसा व्रत करते हैं, वे सब पापोंसे मुक्त हो स्वर्गलोकमें जाते हैं ।
इसके पढ़ने और सुननेसे अश्वमेध यज्ञका फल मिलता है।
gar पूछा--केशव ! भाद्रपद मासके शुक्लपक्षमें जो एकादशी
होती है, उसका क्या नाम, कौन देवता और कैसी विधि है ? यह बताइये |
भगवान् श्रीकृष्ण बोले--राजन् ! इस विषयमें मैं तुम्हें आश्चर्यजनक
कथा सुनाता हूँ; जिसे ब्रह्माजीने महात्मा नारदसे कहा था। नारदजीने पूछा--चतुर्मुख / आपको नमस्कार है। मैं भगवान् | विष्णुकी आराधनाके लिये आपके मुखसे यह सुनना चाहता हूँ कि भाद्रपद
* मासके शुक्लपक्षमें कौन-सी-एकादशी होती है ? ब्रह्माजीने कहा--मुनिश्रेष्ठ | तुमने बहुत उत्तम बात पूछी है। क्यों न
हो, वैष्णव जो ठहरे। भादोंके शुकृपक्षकी एकादशी ‘ven’ के नामसे
विख्यात है। उस दिन भगवान् हषीकेशकी पूजा होती है। यह उत्तम AA
अवश्य करने योग्य है। पुराणों मे
अयन-
भगवान
वर्षा क णको जके राजा
मिल
गी।
मेँ वे द्शी
है| वान् र्र्पद