युधिष्ठिर बोले — देवदेवेश्वर! मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में जो एकादशी होती है, उसका क्या नाम है? उसकी विधि क्या है और उसमें किस देवता का पूजन किया जाता है? यह सब कृपा करके बताइये।
श्रीकृष्ण बोले — राजन्! मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की 'उत्पत्ति' एकादशी का वर्णन मैं पहले ही कर चुका हूँ। अब शुक्ल पक्ष की एकादशी सुनो। इसके श्रवणमात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इसका नाम है — 'मोक्षा' एकादशी, जो समस्त पापों का नाश करनेवाली है।
उस दिन तुलसी की मञ्जरी, धूप और दीप से भगवान् दामोदर की पूजा यत्नपूर्वक करनी चाहिये। दशमी और एकादशी के नियम पूर्वोक्त विधि के अनुसार ही पालन करने चाहिये। रात्रि में नृत्य, गीत और स्तुति के द्वारा जागरण करना चाहिये। जिनके पितर पापवश नीच योनि में पड़े हों, वे इस व्रत का पुण्य उन्हें अर्पित कर दें — उन्हें अवश्य मोक्ष मिलेगा, इसमें तनिक भी संदेह नहीं।