अध्याय 1 — आमलकी एकादशी का माहात्म्य और बहेलिये की कथा
अट्ठासी हजार ऋषियों को संबोधित करते हुये सूतजी ने कहा — हे विप्रों! प्राचीन काल में राजा मान्धाता ने महर्षि वशिष्ठ से पूछा — हे वशिष्ठजी! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो कोई ऐसा व्रत बताइये जिससे मेरा कल्याण हो।
महर्षि वशिष्ठ बोले — हे राजन! सब व्रतों में श्रेष्ठ और अंत में मोक्ष देनेवाला आमलकी एकादशी का व्रत है।
राजा ने पूछा — इस व्रत की उत्पत्ति कैसे हुई और इसका विधान क्या है? कृपा कर विस्तार से बताइये।
महर्षि वशिष्ठ बोले — हे राजन! यह व्रत फाल्गुन शुक्ल पक्ष में होता है। इसके प्रभाव से सभी पाप समूल नष्ट हो जाते हैं और इसका पुण्य एक सहस्र गौदान के समान है। आँवले की महत्ता इसमें भी है कि इसकी उत्पत्ति भगवान विष्णु के श्रीमुख से हुई है। अब एक पौराणिक कथा ध्यान से सुनो।
प्राचीन समय में वैदिक नाम का एक नगर था। वहाँ ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र — चारों वर्ण के लोग प्रसन्नतापूर्वक रहते थे। नगर में सदा वेदध्वनि गूँजती रहती थी। कोई पापी, दुराचारी या नास्तिक वहाँ नहीं था।
उस नगर में चैत्ररथ नाम के एक चन्द्रवंशी राजा राज्य करते थे — विद्वान और धार्मिक। उनके राज्य में कोई निर्धन या लोभी नहीं था। सभी भगवान विष्णु के भक्त थे और छोटे-बड़े सब एकादशी का उपवास करते थे।
एक बार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी आई। राजा और प्रजा ने वृद्ध से लेकर बालक तक आनंदपूर्वक उपवास किया। राजा प्रजा सहित मंदिर में आकर कलश स्थापित करके धूप, दीप, नैवेद्य और पंचरत्न से आँवले के वृक्ष की पूजा करने लगे और यह स्तुति की —
हे धात्री! आप ब्रह्मस्वरूपा हैं, ब्रह्माजी द्वारा उत्पन्न और सभी पापों की नाशक हैं। आपको नमस्कार है। आप श्रीरामचन्द्रजी द्वारा सम्मानित हैं — मेरे सभी पापों का हरण करें।
रात को सभी ने जागरण किया। उसी समय एक बहेलिया मंदिर में आया। वह महापापी था — जीव-हिंसा करके कुटुंब पालता था। भूख-प्यास से व्याकुल होकर वह मंदिर के एक कोने में बैठ गया। वहाँ बैठे-बैठे वह भगवान विष्णु की कथा और एकादशी माहात्म्य सुनने लगा। इस प्रकार उस बहेलिये ने अनजाने में सारी रात जागरण में बिता दी। प्रातःकाल वह अपने घर गया और भोजन किया।
कुछ समय बाद उस बहेलिये की मृत्यु हो गई। जीव-हिंसा के कारण वह नरक का भागी था, किंतु आमलकी एकादशी के जागरण के प्रभाव से उसने राजा विदुरथ के यहाँ जन्म लिया और उसका नाम वसुरथ रखा गया।