अध्याय 1 — देव उठानी एकादशी — विष्णु का जागरण
युधिष्ठिर ने पूछा — प्रभो! कार्तिक शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? भगवान ने कहा — राजन्! इसका नाम प्रबोधिनी या देव उठानी एकादशी है। इस दिन चार मासों की योग निद्रा के बाद भगवान विष्णु जागते हैं। यही दिन तुलसी विवाह का भी है और इस दिन से सभी मांगलिक कार्य पुनः आरम्भ होते हैं। स्नान, दान, जप और होम करता है, वह सब अक्षय होता है। जो मनुष्य
उस तिथिको उपवास करके भगवान् माधवकी भत्तिपूर्वक पूजा करते हैं, वे सौ जन्मोंके पापोंसे छुटकारा पा जाते हैं। इस wah द्वार देवेश्वर ! जनार्दनको सन्तुष्ट करके मनुष्य सम्पूर्ण दिशाओंको अपने तेजसे प्रकाशित
करता हुआ श्रीहरिके वैकुण्ठ धामको जाता है। 'प्रबोधिनी' को पूजित
होनेपर भगवान् गोविन्द मनुष्योंके बचपन, जवानी और बुढ़ापेमें किये हुए
सौ जन्मोंके पापोंको, चाहे वे अधिक हों या कम, धो डालते हैं। अतः सर्वथा प्रयत्न करके सम्पूर्ण मनोवाज्छित फलोंको देनेवाले देवाधिदेव
जनार्दनकी उपासना करनी चाहिये। बेटा नारद ! जो भगवान् विष्णुके
भजनमें तत्पर होकर कार्तिकमें पराये अन्नका त्याग करता है, वह चान्द्रायण
अध्याय 2 — तुलसी विवाह और चातुर्मास समाप्ति
AA फल पाता है। जो प्रतिदिन शास्त्रीय चर्चासे wake करते हुए
कार्तिक मास व्यतीत करता है, वह अपने सम्पूर्ण पापोंको जला डालता
और दस हजार यज्ञोंका फल प्राप्त करता है। कार्तिक मासमें शास्त्रीय
कथाके कहने-सुननेसे भगवान् मधुसूदनको जैसा संन्तोष होता है, वैसा
उन्हें यज्ञ, दान अथवा जप आदिसे भी नहीं होता। जो शुभकर्म-परायण
पुरुष कार्तिक मासमें एक या आधा इलोक भी भगवान् विष्णुकी कथा
बाँचते हैं, उन्हें सौ गोदानका फल मिलता है | महामुने | कार्तिकमें भगवान्
केशबके सामने शास्त्रका स्वाध्याय तथा श्रवण करना चाहिये। मुनिश्रेष्ठ !
जो कार्तिकमें कल्याण-प्राप्तिके लोभसे श्रीहरिकी कथाका प्रबन्ध करता है,
वह अपनी सो पीढ़ियोंको तार देता है| जो मनुष्य सदा नियमपूर्वक कार्तिक
मासमें भगवान् विष्णुकी कथा सुनता है, उसे गोदानका फल मिलता
है। जो 'प्रबोधिनी' एकादशीके दिन श्रीविष्णुकी कथा श्रवण करता है, उसे
सातों द्वीपोंसे युक्त पृथ्वी दान करनेका फल प्राप्त होता है। मुनिश्रेष्ठ ! जो
भगवान् विष्णुकी कथा सुनकर अपनी शक्तिके अनुसार कथा-वाचककी
पूजा करते हैं, उन्हें अक्षय लोककी प्राप्ति होती है। नारद ! जो मनुष्य
कार्तिक मासमें भगवत्संबन्धी गीत और शाख्र-विनोदके द्वारा समय .. बिताता है, उसकी पुनरावृत्ति मैंने नहीं देखी है। मुने ! जो पुण्यात्मा पुरुष - * भगवानके समक्ष गान, नृत्य, वाद्य और श्रीविष्णुकी कथा करता है, वह
तीनों लोकोंके ऊपर विराजमान होता है। मुनिश्रेष्ठर कार्तिककी 'प्रबोधिनी! एकादशीके दिन बहुत-से
फल-फूल, कपूर, अरगजा और कुछुमके द्वारा श्रीहरिकी पूजा करनी
चाहिये | एकादशी SHR धनकी कंजूसी नहीं करनी चाहिये; क्योंकि उस
दिन दान आदि करनेसे असंख्य पुण्यकी प्राप्ति होती है। 'प्रबोधिनी' को
जागरणके समय BWA MH लेकर फल तथा नाना प्रकारके द्र॒व्योंके साथ
श्रीजनार्दनको SA देना चाहिये। सम्पूर्ण dai स्नान करने और सब
प्रकारके दान देनेसे जो फल मिलता है, वही 'प्रबोधिनी' एकादशीको अर्घ्य
देनेसे करोड़ गुना होकर प्राप्त होता है। देवर्षे ! stele पश्चात् भोजन-
: आच्छादन ओर दक्षिणा आदिके द्वारा भगवान् विष्णुकी प्रसन्नताके लिये पूजा करनी चाहिये। जो मनुष्य उस दिन श्रीमद्धागवतकी कथा
सुनता अथवा पुराणका पाठ करता है, उसे एक-एक अक्षरपर कपिला-
दानका फल मिलता है। मुनिश्रेष्ठ ! कार्तिकर्में जो मनुष्य अपनी शक्तिके
अनुसार रीतिसे वैष्णवत्रत (एकादशी) का पालन करता है,
उसकी मुक्ति अविचल है। केतकीके एक पत्तेसे पूजित होनेपर भगवान्
गरुड़ध्वज एक हजार वर्षतक अत्यन्त तृप्त रहते हैं। देवर्षे ! जो अगस्तके
फूलसे भगवान् जनार्दनकी पूजा करता है, उसके दर्शनमात्रसे नरककी आग
बुझ जाती है। वत्स ! जो कार्तिकमें भगवान् जनार्दनको तुलसीके पत्र और
पुष्प अर्पण करते हैं, उनका जन्मभरका किया हुआ सारा पाप भस्म हो जाता
है। मुने ! जो प्रतिदिन दर्शन, स्पर्श, ध्यान, नाम-कीर्तन, स्तवन, अर्पण,
Fee, नित्यपूजन तथा नमस्कारके द्वारा तुलसीमें नव प्रकारकी भक्ति करते
हैं, वे कोटि dee युगोंतक पुण्यका विस्तार करते हैं।# नारद ! सब
* तुलसीदलपुष्पाण ये यच्छन्ति जनार्दने।कार्तिके cons वत्स पाप॑ जन्मार्जितं दहेत् |
-से
ररनी तराथ
सब
न- था