युधिष्ठिर ने पूछा — प्रभो! कार्तिक शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? भगवान ने कहा — राजन्! इसका नाम प्रबोधिनी या देव उठानी एकादशी है। इस दिन चार मासों की योग निद्रा के बाद भगवान विष्णु जागते हैं। यही दिन तुलसी विवाह का भी है और इस दिन से सभी मांगलिक कार्य पुनः आरम्भ होते हैं। स्नान, दान, जप और होम करता है, वह सब अक्षय होता है। जो मनुष्य
उस तिथिको उपवास करके भगवान् माधवकी भत्तिपूर्वक पूजा करते हैं, वे सौ जन्मोंके पापोंसे छुटकारा पा जाते हैं। इस wah द्वार देवेश्वर ! जनार्दनको सन्तुष्ट करके मनुष्य सम्पूर्ण दिशाओंको अपने तेजसे प्रकाशित
करता हुआ श्रीहरिके वैकुण्ठ धामको जाता है। 'प्रबोधिनी' को पूजित
होनेपर भगवान् गोविन्द मनुष्योंके बचपन, जवानी और बुढ़ापेमें किये हुए
सौ जन्मोंके पापोंको, चाहे वे अधिक हों या कम, धो डालते हैं। अतः सर्वथा प्रयत्न करके सम्पूर्ण मनोवाज्छित फलोंको देनेवाले देवाधिदेव
जनार्दनकी उपासना करनी चाहिये। बेटा नारद ! जो भगवान् विष्णुके
भजनमें तत्पर होकर कार्तिकमें पराये अन्नका त्याग करता है, वह चान्द्रायण