अध्याय 1 — देवशयनी एकादशी — विष्णु का शयन
युधिष्ठिर ने पूछा — प्रभो! आषाढ़ शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? भगवान ने कहा — राजन्! इसका नाम देवशयनी एकादशी है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीनों के लिये क्षीरसागर में शयन करते हैं। इन चार मासों में — जिन्हें चातुर्मास कहते हैं — मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। ५४७७७४४४४४४४४४७७४४४४४शशश नकली किया, जिससे उसके शरीरकी कोढ़ दूर हो गयी। मुनिके कथनानुसार उस
उत्तम अनुष्ठान करनेपर वह पूर्ण सुखी हो गया। नृपश्रेष्ठ | यह
योगिनीका . ऐसा ही बताया गया है। जो हजार ब्राह्मणोंको
भोजन कराता है, उसके समान ही फल उस मनुष्यको भी मिलता है, जो
योगिनी एकादशीका करता है। 'योगिनी' महान् पापोंको शान्त
करनेवाली और महान् पुण्य-फल देनेवाली है। इसके पढ़ने और सुननेसे
मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। युथ्चिष्टिने पूछा--भगवन् ! आषाढ़के शुक्लपक्षमें कौन-सी एकादशी
होती है ? उसका नाम और विधि क्या है ? यह बतलानेकी कृपा करें। भगवान् श्रीकृष्ण बोले--राजन् ! आषाढ़ शुक्लपक्षकी एकादशीका
नाम 'शयनी' है। मैं उसका वर्णन करता हूँ। वह महान् पुण्यमयी, स्वर्ग
एवं मोक्ष प्रदान करनेवाली, सब पापोंको हरनेवाली तथा उत्तम ब्रत है।
आषाढ़ wet एकादशीके दिन जिन्होंने कमल-पुष्पसे
कमललोचन भगवान् विष्णुका पूजन तथा एकादशीका उत्तम व्रत किया है,
उन्होंने तीनों लोकों और तीनों सनातन देवताओंका पूजन कर लिया।
हरिशयनी एकादशीके दिन मेरा एक स्वरूप राजा बलिके यहाँ रहता है और
दूसरा क्षीरसागरमें शेषनागकी शय्यापर तबतक शयन करता है, जबतक
आगामी कार्तिककी एकादशी नहीं आ जाती; अतः आषाढ़शुक्ला एकादशीसे
लेकर कार्तिकशुक्ला एकादशीतक मनुष्यको भलीभाँति धर्मका आचरण
करना चाहिये। जो मनुष्य इस ब्रतका अनुष्ठान करता है, वह परम गतिको
श्राप्त होता है, इस कारण यल्रपूर्वक इस एकादशीका करना चाहिये।
एकादशीकी रातमें जागरण करके Tg, चक्र और गदा धारण करनेवाले
भगवान् विष्णुकी भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिये। ऐसा करनेवाले पुरुषके
पुण्यकी गणना HA चतुर्मुख ब्रह्माजी भी असमर्थ हैं। राजन् st इस
TER भोग ओर मोक्ष प्रदान करनेवाले सर्वपापहारी एकादशीके उत्तम
ब्रतका पालन करता है, वह जातिका चाण्डाल होनेपर भी संसारमें सदा AT
प्रिय करनेवाला है। जो मनुष्य दीपदान, पल्ाशके पत्तेपर भोजन और व्रत uo ...._ एकादशी-द्रतका माहात्म्य जे हो हरे हद और औे हैर कर हरे हद है डे हि है फैे हर अरे है है डर फैर #ए डर की डरे करे डरे है है हे ही ही हि हि है ही "है हरि हे हैई है है है हि हे है पे कै औे की हि ही डर की के है डे मै ही NKR, करते हुए चौमासा व्यतीत करते हैं, वे मेरे प्रिय हैं। चौमासेमें भगवान् विष्णु
सोये रहते हैं; इसलिये मनुष्यको भूमिपर शयन करना चाहिये। सावनमें
साग, भादोंमें दही, 'कारमें दूध ओर कार्तिकमें दालका त्याग कर देना
चाहिये ।# अथवा जो चौमासेमें ब्रह्मचर्यका पालन करता है, वह परम
गतिको प्राप्त होता है। राजन् ! एकादशीके व्रतसे ही मनुष्य सब पापोंसे
मुक्त हो जाता है; अतः सदा इसका ब्रत करना चाहिये। कभी भूलना नहीं
चाहिये। “शयनी' ओर 'बोधिनी'के बीचमें जो कृष्णपक्षकी एकादरशियाँ
होती हैं, गृहस्थके लिये वे ही aq रखने योग्य हैं--अन्य मासोंकी
कृष्णपक्षीय एकादशी गृहस्थके रखने योग्य नहीं होती। शुक्लपक्षकी
एकादशी सभी करनी चाहिये | श्रावण मासकी 'कामिका' ओर ‘gaat’