अध्याय 1 — कामिका एकादशी की विधि और महिमा
युधिष्ठिर ने पूछा — प्रभो! श्रावण कृष्ण एकादशी का क्या नाम है? भगवान ने कहा — राजन्! इसका नाम कामिका एकादशी है। इस दिन तुलसी से भगवान विष्णु का पूजन करना अत्यंत पुण्यकारी है। जो श्रावण में तुलसी के पत्तों से विष्णु का पूजन करता है, उसे सब तीर्थों के स्नान का फल मिलता है। श्रावण मासकी “कामिका' और 'पुत्रदा' एकादशीका माहात््य. ५९ रे है कै है है हे हे हे हे डरे डे डरे ड़ हरे जे हे हरि हरे के के डरे हे की जे जे औ जे के के. RAKKKKAKKKKKK KKKKKKKKKIKKKIAKK है मी कहे डी के डी. तुम्हारे HAH उत्तर दे रहा हूँ। श्रावणमासमें जो कृष्णपक्षकी एकादशी होती
है, उसका नाम “कामिका' है; उसके स्मरणमात्रसे वाजपेय यज्ञका फल
मिलता है। उस दिन श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव और मधुसूदन आदि
नामोंसे भगवान्का पूजन करना चाहिये। भगवान् श्रीकृष्णके पूजनसे जो
फल मिलता है, वह mH, काशी, नैमिषारण्य तथा पुष्कर क्षेत्रमें भी सुलभ
नहीं है। सिंहराशिके बृहस्पति होनेपर तथा व्यतीपात और दण्डयोगमें
गोदावरीस्नानसे जिस फलकी प्राप्ति होती है, वही फल भगवान् श्रीकृष्णके
पूजनसे भी मिलता है। जो समुद्र और वनसहित समूची पृथ्वीका दान
करता है तथा जो कामिका एकादशीका व्रत करता है, वे दोनों समान
फलके भागी माने गये हैं। जो ब्यायी हुई गायको अन्यान्य सामग्रियोंसहित
दान करता है, उस मनुष्यको जिस फलकी प्राप्ति होती है, वही 'कामिका'का
ब्रत करनेवालेको मिलता है। जो नरश्रेष्ठ श्रावणमासमें भगवान् श्रीधरका
पूजन करता है, उसके द्वारा sik नागोंसहित सम्पूर्ण देवताओंकी
पूजा हो जाती है; अतः पापभीरु मनुष्योंको यथाशक्ति पूरा wae करके
'कामिका'के दिन श्रीहरिका पूजन करना चाहिये। जो पापरूपी भरे
हुए संसारसमुद्रमें डूब रहे हैं, उनका उद्धार करनेके लिये कामिकाका सबसे उत्तम है। अध्यात्मविद्यापरायण पुरुषोंको जिस फलकी प्राप्ति होती है;
उससे बहुत अधिक फल 'कामिका' ब्रतका सेवन करनेवालोंको मिलता
है। 'कामिका'का करनेवाला मनुष्य रात्रिमें जागरण करके न तो कभी
TR यमराजका दर्शन करता है और न कभी दुर्गतिमें ही पड़ता है।
लाल मणि, मोती, बैदूर्य ओर मूँगे आदिसे पूजित होकर भी भगवान्
विष्णु वैसे संतुष्ट नहीं होते, जैसे तुलसीदलसे पूजित होनेपर होते हैं । जिसने
तुलसीकी श्रीकेशबका पूजन कर लिया है; उसके जन्मभरका
पाप निश्चय ही नष्ट हो जाता है। जो दर्शन करनेपर सारे पापसमुदायका नाश
कर देती है, स्पर्श करनेपर शरीरको पवित्र बनाती है, प्रणाम करनेपर रोगोंका
निवारण करती है, जलसे सींचनेपर यमराजको भी भय पहुँचाती है,
आरोपित करनेपर भगवान् श्रीकृष्णके समीप ले जाती है और भगवानके के 77 IS २०००-००... ०१० Ur