अर्जुन ने कहा — हे कमलनयन! एकादशियों की कथाएँ जितनी सुनता हूँ, जिज्ञासा उतनी ही बढ़ती जाती है। अब चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के बारे में बताने की कृपा करें। इसका नाम क्या है, किस देवता का पूजन होता है और व्रत का विधान क्या है?
श्रीकृष्ण बोले — हे अर्जुन! यही प्रश्न राजा मान्धाता ने लोमश ऋषि से पूछा था। जो उन्होंने बताया, वही मैं तुम्हें कहता हूँ।
राजा मान्धाता ने महर्षि लोमश से पूछा — हे ऋषिश्रेष्ठ! मनुष्य के पापों का मोचन किस प्रकार सम्भव है? कोई ऐसा सरल उपाय बताइये।
महर्षि लोमश बोले — हे नृपति! चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम पापमोचनी एकादशी है। इसके व्रत से अनेक पाप नष्ट हो जाते हैं। इसकी कथा ध्यान से सुनो।
प्राचीन समय में चैत्ररथ नाम का एक वन था। वहाँ अप्सराएँ किन्नरों के साथ विहार करती थीं, सदा वसंत का मौसम रहता था, नाना प्रकार के फूल खिले रहते थे। कभी गंधर्व-कन्याएँ विचरती, कभी देवेंद्र अन्य देवताओं के साथ क्रीड़ा करते।
उसी वन में मेधावी नाम के एक ऋषि तपस्या में लीन रहते थे — भगवान शिव के अनन्य भक्त।