युधिष्ठिर ने पूछा — प्रभो! श्रावण शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? भगवान ने कहा — राजन्! इसका नाम पवित्रा या पुत्रदा एकादशी है। यह पुत्र की प्राप्ति करानेवाली है। इसे पवित्रोपाना एकादशी भी कहते हैं। सुनो महिष्मती के राजा महीजित की कथा। अधिकार जमाया तथा दुष्टोंको, वे बन्धु और पुत्रोंक समान ही क्यों न रहे
हों, दण्ड दिया है। fre पुरुषोंका सदा सम्मान किया और किसीको द्वेषका
पात्र नहीं समझा | फिर क्या कारण है, जो मेरे घरमें आजतक पुत्र उत्पन्न
नहीं हुआ। आपलोग इसका विचार करें |' राजाके ये वचन सुनकर प्रजा और पुरोहितोंके साथ ब्राह्मणोने उनके
हितका विचार करके गहन प्रवेश किया। राजाका कल्याण
चाहनेवाले वे सभी लोग इधर-उधर घूमकर ऋषिसेवित आश्रमोंकी तलाश
करने लगे। इतनेहीमें उन्हें मुनिश्रेष्ठ लोमशका दर्शन हुआ। लोमशजी ५०९५५. ella ३933 uy एकादशी-ब्रतका माहात्म्य
उनका दारीर लोमसे भरा हुआ है। वे ब्रह्माजीके समान तेजस्वी हैं। एक-एक
कल्प SAIL उनके AANA एक-एक लोम विशीर्ण होता--टूटकर गिरता है;
- इसीलिये उनका नाम लोमश हुआ है । वे महामुनि तीनों कालोंकी बातें जानते हैं।
उन्हें देखकर सब लोगोंको बड़ा हर्ष हुआ | उन्हें निकट आया देख लोमशजीने
पूछा--'तुम सब लोग किसलिये यहाँ आये हो ? अपने आगमनका कारण
बताओ | तुमलोगोंके लिये जो हितकर कार्य होगा, उसे मैं अवश्य करूँगा।
प्रजाओंने कहा--ब्रह्मनू ! इस समय महीजित् नामवाले जो राजा हें, उन्हें कोई पुत्र नहीं है। हमलोग प्रजा हैं, जिनका उन्होंने पुत्रकी ' भाँति पालन किया है। उन्हें पुत्रहीन देख, उनके दुःखसे दुःखित हो हम
तपस्या करनेका दृढ़ निश्चय करके यहाँ आये हैं | द्विजोत्तम | राजाके भाग्यसे इस समय हमें आपका दर्शन मिल गया है। महापुरुषोंके दर्शनसे ही मनुष्योंके सब कार्य सिद्ध हो जाते हैं | मुने ! अब हमें उस उपायका उपदेश
कीजिये, जिससे राजाको पुत्रकी प्राप्ति हो | उनकी बात सुनकर महर्षि लोमश दो घड़ीतक BMA हो गये।
तत्पश्चात् राजाके प्राचीन जन्मका वृत्तात्त जानकर उन्होंने कहा--
SIGS | सुनो--राजा महीजित् पूर्वजन्ममें मनुष्योंको चूसनेवाला धनहीन
वैश्य था। वह वैश्य गाँव-गाँव घूमकर व्यापार किया करता था | एक दिन
जेठके शुकृपक्षमें दशमी तिथिको, जब दोपहरका सूर्य तप रहा था, वह
गाँवकी सीमामें एक TORT पहुँचा | पानीसे भरी हुईं बावली देखकर
वैश्यने वहाँ जल पीनेका विचार किया | इतनेहीमें वहाँ बछड़ेके साथ एक गौ
भी आ पहुँची । वह प्याससे व्याकुल और तापसे पीड़ित थी; अतः बावलीमें ' जाकर जल पीने लगी । ST पानी पीती हुई गायको हाँककर दूर हटा दिया और स्वयं पानी पीया | उसी पाप-कर्मके कारण राजा इस समय पुत्रहीन हुए
हैं। किसी जन्मके पुण्यसे इन्हें अकण्टक राज्यकी प्राप्ति SMS कहा--मुने ! पुराणमें सुना जाता है कि प्रायश्रित्तरूप पुण्यसे पाप नष्ट होता है; अतः पुण्यका उपदेश कीजिये, जिससे उस
पापका नाश हो जाय।